भूतों की दुनिया में जागर विद्या: Uttarakhand Me Jab Guru ke Bete ko Bhoot Le Gaye Pani Ke Nichi

भूतों की दुनिया में जागर विद्या: Uttarakhand Me Jab Guru ke Bete ko Bhoot Le Gaye Pani Ke Nichi

Ghost Realm Mystery

मैं उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में रहने वाला हूँ। आज मैं आपके लिए एक ऐसी कहानी लेकर आया हूँ जो तालासल्ट, अल्मोड़ा में बहुत प्रसिद्ध है। यह घटना लगभग 30-40 साल पुरानी है और पूरी तरह सच्ची मानी जाती है।

उत्तराखंड के गाँवों में जागर की प्रथा होती है, जहाँ लोग देवी-देवताओं की पूजा करके सुख-शांति की कामना करते हैं। यदि कोई दुखी होता है या किसी परेशानी में होता है, तो उसका समाधान निकालने के लिए भी जागर लगाया जाता है। इस जागर को जागर गुरु ही संपन्न कराते हैं।

भूतों को बुलाने वाली गलती

एक बार, एक जागर गुरु अपने गाँव में पूजा के लिए गए थे। पहाड़ों में आजीविका के लिए उन्होंने भी बकरियाँ पाली थीं। उस दिन उनका बेटा अपने बकरियों के झुंड के साथ जंगल में जाने का फैसला करता है। गाँव के कुछ और लोग भी उसके साथ नदी के किनारे बकरियाँ चराने के लिए जाते हैं।

चारों तरफ शांति थी, सब कुछ सामान्य लग रहा था। जागर गुरु इन दिनों अपने बेटे को जागर विद्या सिखा रहे थे, इसलिए वह भी बकरियाँ चराते-चराते मंत्रों का अभ्यास करने लगा। वह एक पत्थर पर बैठा और जोश में आकर जोर-जोर से मंत्रों का उच्चारण करने लगा।

ये मंत्र अलग-अलग प्रकार के होते हैं:

  • भूतों को बुलाने के लिए अलग मंत्र,
  • नरसिंह भगवान के लिए अलग,
  • हनुमान जी के लिए अलग

बच्चे को जागर विद्या सीखते एक साल हो गया था, लेकिन उसके पास कोई डमरू नहीं था। इसलिए उसने पत्थर से पत्थर टकराकर आवाज़ निकालनी शुरू कर दी और साथ में भूतों को बुलाने वाले मंत्रों का जाप करने लगा।

उसकी आवाज़ इतनी तेज़ थी कि गाँव के लोग और जानवर डर गए। उसके साथ गए लोगों ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन वह अपने पिता से सीखे मंत्रों को याद करने में इतना तल्लीन था कि उसने किसी की बात नहीं सुनी।

कुछ ही पलों में, मंत्रों की गूँज गहरे पानी के भीतर तक पहुँच गई। अचानक चार-पाँच भूत पानी के अंदर से बाहर निकल आए

भूतों ने बच्चे को खींच लिया

भूतों को देखते ही गाँव के सभी लोग डर के मारे बेहोश हो गए। लेकिन बच्चा अपनी साधना में इतना मग्न था कि उसे भूतों के आने का अहसास तक नहीं हुआ। भूतों ने उसे पानी के अंदर खींच लिया

जब बाकी लोग होश में आए, तो उन्होंने देखा कि बच्चा गायब था। सब घबराकर गाँव लौटे और यह खबर उसके पिता जागर गुरु को दी। यह सुनते ही जागर गुरु ने कहा:
“मेरे बेटे ने बहुत बड़ी गलती कर दी। वह मंत्र अभी अधूरे ही सीख पाया था। अब उसे कोई नहीं बचा सकता!”

गाँव के सभी लोग बच्चे की मृत्यु मानकर शोक मनाने लगे। पिता ने सिर मुंडवा लिया और बच्चे की आत्मा की शांति के लिए पूजा-पाठ शुरू कर दिया

भूतों की दुनिया में जागर विद्या

इधर, जब भूत बच्चे को अपने अंधेरे लोक में ले गए, तो वह डरने के बजाय मंत्रों का जाप करता रहा। वहाँ के भूतों के राजा ने कहा:

“आज तक हमने ऐसे मंत्र नहीं सुने। तुम्हारी गायन शक्ति हमें बहुत पसंद आई। हमें ये मंत्र सुनाओ!”

यह सुनते ही अब बच्चा डरने लगा और हाँफने लगा, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और कहा:

“मैंने यह सब अपने पिता से सीखा है। मेरे पिता जागर गुरु हैं। मुझसे गलती हो गई कि मैंने इन मंत्रों को यहाँ गाया, लेकिन मैं आपको फिर से सुनाऊँगा।”

फिर उसने आगे कहा:

“मेरे पास कोई डमरू नहीं है, जिससे मैं मंत्रों का सही उच्चारण कर सकूँ।”

यह सुनकर भूतों के राजा ने कहा:

“मैं अभी तुम्हें एक तांबे का डमरू देता हूँ।”

अब बच्चे ने आँखें बंद कर पूरे मन से मंत्रों का जाप करना शुरू किया। वह लगातार सात दिनों तक मंत्रों का उच्चारण करता रहा। धीरे-धीरे मंत्र सिद्ध हो गए। अब उसने जाप बंद कर दिया।

सभी भूत उन मंत्रों से प्रसन्न हो गए। फिर बच्चे ने कहा:

“अब मुझे वापस छोड़ दो।”

भूतों के राजा ने कहा:

“तुम हमारे साथ शामिल हो जाओ!”

लेकिन लड़के ने मना कर दिया। सभी भूतों ने उसे यहीं पाताल लोक में रहने की सलाह दी और कहा:

“हमने आज तक किसी को वापस नहीं छोड़ा है।”

अब बच्चे को समझ आ गया कि वे उसे ऐसे नहीं जाने देंगे। उसने कहा:

“मैं भूतों के मंत्र भी जानता हूँ।”

सभी भूतों ने हामी भरी और बोले:

“हाँ, सुनाओ!”

बच्चे ने फिर कहा:

“मैं हनुमान जी के मंत्र भी जानता हूँ, क्या मैं वह भी सुनाऊँ?”

इतना सुनते ही भूतों का राजा माफी माँगने के लिए बच्चे के पास आ गया और उसे ऐसा करने से रोक दिया।

भूतों के राजा ने हामी भर दी। तब लड़के ने आदेश दिया:

“मुझे वापस पृथ्वी लोक भेज दो!”

भूतों के राजा ने आदेश का पालन किया और बच्चे को वापस छोड़ दिया।

डमरू का रहस्य

जब जाने का समय आया, तो बच्चे ने कहा:

“मैं इस तांबे के डमरू को यहीं छोड़ देता हूँ।”

लेकिन भूतों के राजा ने कहा:

“नहीं, इसे अपने पास रखो। यह हमारी तरफ से तुम्हारे लिए एक भेंट है!”

बच्चा वापस उसी पत्थर के पास प्रकट हुआ, जहाँ से वह भूतों की दुनिया में गया था। फिर वह अपने गाँव की ओर चल पड़ा।

जब वह घर पहुँचा, तो उसने देखा कि उसके पिता ने सिर मुंडवा लिया था। गाँव के लोग उसे देखकर हैरान रह गए। फिर उसने सबको अपनी आपबीती सुनाई और डमरू दिखाया।

डमरू की शक्ति

जागर गुरु ने उसे इस विद्या को संभलकर इस्तेमाल करने की सलाह दी। बाद में, उस तांबे के डमरू को एक मंदिर में स्थापित कर दिया गया।

धीरे-धीरे यह घटना पूरे गाँव में फैल गई और आज भी अल्मोड़ा के तालासल्ट में इस कहानी को याद किया जाता है।

इस कहानी से सीख

जागर मंत्रों का प्रयोग सही ज्ञान और गुरु के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए।

कुछ रहस्यों को समझने और जानने में समय लगता है, धैर्य और सही मार्गदर्शन जरूरी है।

Deepak Sundriyal

अपण पहाड़, अपण गाथा
  • Post category:Bhutiya Kahani
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