Radha Shayari | सच्चा प्रेम और भक्ति से भरी राधा कृष्ण शायरी-radha shayari

Radha Shayari | सच्चा प्रेम और भक्ति से भरी राधा कृष्ण शायरी-radha shayari

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राधा बिना श्याम अधूरे लगते हैं,
जैसे बिना धड़कन के दिल लगते हैं।
सच्चे प्रेम की पहचान है राधा,
जिनके बिना कृष्ण भी शून्य लगते हैं।

राधा की भक्ति में जो खो जाता है,
वो प्रेम का सच्चा अर्थ समझ जाता है।
यह इश्क नहीं, आत्मा का नाता है,
जो जन्म-जन्मांतर तक निभाया जाता है।

राधा का नाम जब जुबां पर आता है,
मन प्रेम और श्रद्धा से भर जाता है।
हर धड़कन में बसते हैं कृष्ण,
हर सांस में राधा का गीत गूंजता है।

राधा के बिना कान्हा भी अधूरे,
जैसे बिना बारिश के बादल अधूरे।
प्रेम की परिभाषा राधा से सीखो,
जहाँ समर्पण है, जहाँ भाव हैं पूरे।

जिस प्रेम में कोई स्वार्थ न हो,
बस समर्पण और विश्वास हो।
ऐसा ही था राधा का प्यार,
जहाँ बस कृष्ण का एहसास हो।

राधा की भक्ति, राधा की मस्ती,
राधा में ही बसी है कान्हा की बस्ती।
प्रीत की ये रीत सिखाती हमें,
प्रेम में होती है शक्ति भी सच्ची।

राधा की रूह में बसे हैं श्याम,
जैसे बांसुरी में बसते हैं सुर के संग्राम।
सच्चा प्रेम बस यही कहलाता है,
जहाँ खुद का नहीं, सिर्फ प्रिय का नाम आता है।

राधा का नाम कृष्ण के साथ जुड़ा,
इसमें ही छुपा है प्रेम का पूरा समरूप।
जहाँ स्वार्थ नहीं, जहाँ तकरार नहीं,
बस समर्पण है, बस इंतजार सही।

कान्हा की बांसुरी में जो मिठास है,
राधा की भक्ति से वो खास है।
जहाँ प्रेम का सागर लहराता है,
वहाँ राधा-कृष्ण का नाम आता है।

राधा के प्रेम का कोई मोल नहीं,
इसमें कोई लालच या छल नहीं।
बस समर्पण और श्रद्धा की लहरें,
जो हर युग में गूंजती रहें।

प्यार का सबसे सुंदर स्वरूप है राधा,
जिनकी आत्मा में बसते हैं माधव।
कोई छल नहीं, कोई मोह नहीं,
बस समर्पण की अटूट साधना।

राधा नाम की गूंज जहाँ होती है,
वहाँ प्रेम की गंगा बहती है।
यह प्रेम नहीं, यह पूजा है,
जहाँ भक्त और भगवान एक होते हैं।

राधा की आँखों में जो भाव हैं,
वही सच्चे प्रेम का जवाब हैं।
जहाँ कोई चाह नहीं, जहाँ कोई राह नहीं,
बस कृष्ण का नाम ही सारा जहान है।

कृष्ण के बिना राधा अधूरी,
राधा के बिना प्रेम की परिभाषा अधूरी।
जहाँ प्रेम का असली रूप हो,
वहाँ राधा-कृष्ण की गाथा जरूरी।

राधा की आँखों में बसी जो तस्वीर है,
वो कृष्ण की मोहक तक़दीर है।
प्यार का वो अटूट बंधन है,
जो जन्म-जन्मांतर तक अधीर है।

श्याम के बिना राधा की पहचान नहीं,
राधा बिना श्याम का कोई नाम नहीं।
ये प्रेम का ऐसा संगम है,
जहाँ शब्द नहीं, बस एहसास सही।

राधा ने प्रेम को पूजा बना दिया,
श्रद्धा में प्रेम का दीप जला दिया।
जिसे लोग दुनिया से छुपाते रहे,
राधा ने उसे खुदा बना दिया।

बिना बोले भी राधा सब कह जाती,
बस कान्हा की बांसुरी पर मुस्कुराती।
जहाँ प्रेम हो बिना शर्तों के,
वहाँ राधा की छवि नजर आती।

राधा का नाम सच्चे मन से जो लेता है,
उसका हर अधूरा काम पूरा हो जाता है।
प्रेम की इस सुंदर परिभाषा में,
हर कोई कृष्ण की छवि पाता है।

कृष्ण के बिना राधा अधूरी,
राधा के बिना प्रेम की तस्वीर अधूरी।
जहाँ प्रेम का असली सार मिले,
वहाँ राधा-कृष्ण की तसवीर ज़रूरी।

राधा प्रेम की परिभाषा बन गई,
अपने प्रेम में साधना बन गई।
जहाँ प्रेम में छल नहीं, स्वार्थ नहीं,
बस समर्पण की भाषा बन गई।

राधा की नजरों में जो स्नेह था,
वही कृष्ण के प्रेम का गहना था।
जहाँ एक-दूजे में खो जाने का अहसास हो,
वहीं सच्चे प्रेम का बसेरा था।

बांसुरी की तान जब छूती राधा के कान,
हर धड़कन बन जाती एक मधुर गान।
संसार की हर मोह माया छोड़कर,
राधा ने अपनाया प्रेम का महान बलिदान।

राधा के प्रेम का कोई अंत नहीं,
हर युग में गूंजे उसका मधुर गीत सही।
जहाँ प्रेम का दरिया बहता है,
वहाँ कृष्ण का नाम गूंजता है।

राधा की भक्ति में वो जादू था,
जो कान्हा के मन को छू जाता था।
जहाँ प्रेम में स्वार्थ नहीं, चाह नहीं,
बस समर्पण ही सच्चा उपहार था।

राधा नाम की जोत जलती रहे,
हर भक्त की आँखें उसे ढूंढती रहें।
यह प्रेम केवल एक कहानी नहीं,
यह तो आत्मा का गहरा नाता रहे।

राधा ने प्रेम को अपना जीवन बना लिया,
हर सांस में कृष्ण का नाम बसा लिया।
जहाँ प्यार में खुद को मिटाना आ जाए,
समझो प्रेम का असली अर्थ पा लिया।

राधा की आँखों में समंदर सा प्यार है,
हर लहर में कृष्ण का इकरार है।
जहाँ प्रेम में समर्पण की गहराई हो,
वहीं सच्चे रिश्तों की भरमार है।

राधा का प्रेम मंदिर की घंटी सा पावन,
जहाँ हर धड़कन बनती कृष्ण का गायन।
जहाँ प्रेम से ऊपर भक्ति हो,
वहाँ राधा का नाम अमर है।

Deepak Sundriyal

अपण पहाड़, अपण गाथा
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