उत्तराखंड की रहस्यमयी जागर: जब जागर गुरु का सामना हुआ भूतों से

उत्तराखंड की रहस्यमयी जागर: जब जागर गुरु का सामना हुआ भूतों से

Jagar Rituals in Uttarakhand

उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है। यहाँ की हर गली, हर गाँव में देवी-देवताओं और लोक मान्यताओं की कहानियाँ छिपी हैं। खासकर कुमाऊं और गढ़वाल में जागर की परंपरा बहुत पुरानी है।

जागर एक धार्मिक अनुष्ठान होता है। इसमें जगरी गुरु देवी-देवताओं को बुलाते हैं। उनसे सवाल पूछे जाते हैं और परेशानियों का हल निकाला जाता है।

लेकिन कभी-कभी कुछ ऐसा हो जाता है, जो समझ से बाहर होता है। यह कहानी मेरे बुबू (दादाजी) की है। वे एक जगरी गुरु थे।

एक रात, जब वे एक गाँव में रुके, तो उनके साथ कुछ अजीब और डरावना हुआ। इस घटना को आज भी हमारा परिवार याद करता है।

जगरी गुरु की रहस्यमयी यात्रा

करीब 60 साल पहले की बात है। उन दिनों सड़कों की हालत बहुत खराब थी। लोग अधिकतर पैदल ही सफर करते थे।

मेरे बुबू को एक गाँव में जागर लगाने जाना था। रास्ता लंबा था। उन्होंने सोचा कि किसी जान-पहचान वाले के घर एक रात रुककर आगे बढ़ेंगे।

उनका एक पुराना जजमान रास्ते में रहता था। जब मेरे बुबू वहाँ पहुँचे, तो जजमान ने आदर-सत्कार किया।

रात का खाना खाते समय जजमान ने कहा—

*“गुरु जी, घर में जगह कम है। मैंने एक नया मकान बनवाया है, आप वहीं सो जाइए। मेरी बहू भी वहीं है। कुछ दिन पहले ही उसने बच्चा जना है। वह अंदर कमरे में सो रही है।”

मेरे बुबू ने कोई शक नहीं किया और नए मकान में चले गए। उन्हें क्या पता था कि वहाँ रात बहुत अजीब होने वाली थी।

नए घर का अजीब माहौल

कुमाऊं में पुराने घर गैलरी टाइप के होते हैं। घर के अंदर कमरे होते हैं और बाहर एक बड़ी बालकनी (ओसारा) होती है, जहाँ सोने की जगह होती है।

मेरे बुबू को बालकनी में चारपाई लगा दी गई।

उन्होंने अपना हुरका (वाद्य यंत्र) पास में रख दिया और हमेशा की तरह एक लोटा जल भी पास में रख दिया।

भीतर जजमान की बहू अपने नवजात शिशु के साथ सो रही थी। सब कुछ सामान्य लग रहा था।

लेकिन रात गहराने लगी, और अजीब घटनाएँ शुरू हो गईं…

रात के सन्नाटे में अजीब आवाज़ें

करीब रात के 1 बजे, अचानक मेरे बुबू को अजीब सी सरसराहट सुनाई देने लगी।

पहले तो उन्हें लगा कि हवा चल रही है, लेकिन फिर धीरे-धीरे किसी के फुसफुसाने की आवाज़ें भी आने लगीं।

वे धीरे से उठे और बालकनी से झाँका।

बाहर धुंधलका था, लेकिन उन्होंने देखा कि 8-10 परछाइयाँ घर के बाहर खड़ी थीं।

वे लंबे थे, सफेद कपड़े पहने हुए थे, और उनकी आँखें चमक रही थीं।

उनमें से एक भारी आवाज़ में बोला—

“इस घर में एक महिला ने बच्चा जना है। हमें उसका कलेजा चाहिए!”

दूसरी आवाज़ आई—

“हाँ, लेकिन जागर गुरु बाहर सो रहे हैं। उनके पास हुरका और जल रखा है, इससे हमारी शक्ति कमज़ोर हो जाएगी!”

मेरे बुबू के रोंगटे खड़े हो गए।

दरवाजे पर हलचल

वे सभी धीरे-धीरे घर के दरवाजे की ओर बढ़ने लगे।

दरवाजा भीतर से बंद था, लेकिन उनकी चाल अजीब थी— जैसे वे हवा में तैर रहे हों।

फिर उनमें से एक बुजुर्ग सा दिखने वाला व्यक्ति बोला—

“यहाँ जाना ठीक नहीं। इस घर में देवी की शक्ति मौजूद है। लेकिन हमें कहीं और जाना होगा। पास के गाँव में भी एक महिला ने 3-4 दिन पहले बच्चा जना है। वहाँ चलो!”

इतना सुनते ही सभी धीरे-धीरे गायब होने लगे।

मेरे बुबू ने साँस रोककर सब कुछ देखा, लेकिन कुछ नहीं बोले।

सुबह की रहस्यमयी खबर

रातभर मेरे बुबू सो नहीं पाए।

सुबह हुई, तो उन्होंने जजमान से कुछ नहीं कहा। उन्होंने जल्दी से स्नान किया, पूजा की और फिर अपने गंतव्य की ओर बढ़ गए।

लेकिन असली डर तब आया, जब उन्हें गाँव पहुँचते ही एक ख़बर मिली।

पास के गाँव में एक महिला और उसके नवजात शिशु की अचानक मौत हो गई।

गाँव में लोग कह रहे थे—

“बच्चा 3-4 दिन पहले ही पैदा हुआ था। रात में अचानक उसकी माँ और उसकी भी मौत हो गई। किसी को समझ नहीं आ रहा कि हुआ क्या था।”

मेरे बुबू को पिछली रात की घटना याद आ गई।

उन्होंने मन में सोचा—

“क्या वे वही ताकतें थीं, जिन्होंने इस माँ और बच्चे को शिकार बनाया?”

लेकिन इस सवाल का जवाब कभी नहीं मिला।

क्या यह सिर्फ़ संयोग था?

उत्तराखंड के गाँवों में आज भी ऐसी घटनाएँ सुनी जाती हैं। जागर गुरु को अब भी देवी-देवताओं का संदेशवाहक माना जाता है।

लोग मानते हैं कि सच्ची भक्ति से बुरी शक्तियाँ दूर रहती हैं।

मेरे बुबू उस घटना के बाद और भी सम्मानित हो गए। गाँव में कहा जाने लगा कि जहाँ वह रहते हैं, वहाँ बुरी शक्तियाँ पास नहीं आ सकतीं।

Deepak Sundriyal

अपण पहाड़, अपण गाथा
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