उत्तराखंड का रहस्यमयी हिल स्टेशन: खौफनाक गुफा और परियों की अद्भुत कहानी

उत्तराखंड का रहस्यमयी हिल स्टेशन: खौफनाक गुफा और परियों की अद्भुत कहानी

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यह कहानी हमारे एक फॉलोअर ने भेजी है, जिन्होंने अपना नाम और स्थान गोपनीय रखने का अनुरोध किया है। उनके अनुसार, यह घटना उत्तराखंड के एक दूरस्थ गाँव की है, जहाँ उन्होंने खुद इन रहस्यमयी घटनाओं का अनुभव किया।

उत्तराखंड की वादियों में बसे छोटे-से सुरम्य गाँव “सराद” की यह कहानी है। यह गाँव अपनी प्राकृतिक सुंदरता और खुशहाल जीवनशैली के लिए जाना जाता था। लेकिन एक समय ऐसा आया जब गाँव में अजीब घटनाएँ होने लगीं। लोगों की चीज़ें गायब होने लगीं, और गाँववाले डर और चिंता में डूब गए।

अनोखी घटना की शुरुआत

एक दिन गाँव का व्यक्ति अपनी बकरियों को चराने पहाड़ी पर ले गया। दिनभर की थकान के बाद उसने वहीं आराम करने का सोचा। ठंडी हवा और शांत वातावरण में उसकी आँख लग गई। जब वह जागा, तो उसने देखा कि उसकी सभी बकरियाँ गायब थीं। पहले तो उसने सोचा कि शायद वे खुद घर लौट गई होंगी। यह सोचकर वह जल्दबाजी में घर लौटा, लेकिन घर पहुँचने पर पाया कि वहाँ एक भी बकरी नहीं थी। यह देखकर उसका दिल बैठ गया।

उस रात वह बेचैन रहा। बकरियाँ न केवल उसकी रोजी-रोटी का जरिया थीं, बल्कि उसके लिए परिवार जैसा महत्व रखती थीं। पूरी रात वह सोचता रहा कि बकरियाँ आखिर कहाँ गईं और वह उन्हें कैसे ढूँढ पाएगा।

गाँववालों की चिंता और जंगल की खोज

उसने अगले दिन सुबह पहाड़ और जंगल में अपनी बकरियों को ढूँढने का फैसला किया। पूरा गाँव उसकी मदद के लिए जंगल में बकरियाँ खोजने निकला। लेकिन न तो बकरियाँ मिलीं और न ही कोई सुराग। इसके उलट, चार गाँववाले जो जंगल में मदद के लिए गए थे, अचानक गायब हो गए। अब पूरे गाँव में डर का माहौल बन गया।

गुफा का राज़ और पहली झलक

डर के बावजूद, चरवाहे ने सच्चाई का पता लगाने का फैसला किया। वह अपनी दराँती और एक मशाल लेकर रात में जंगल की ओर चला गया। पहाड़ी पर पहुँचते ही उसे एक बड़ी गुफा दिखाई दी। गुफा के अंदर से अजीब-सी आवाजें आ रही थीं। ऐसा लगा मानो कोई फुसफुसा रहा हो या रो रहा हो।

जब वह अंदर दाखिल हुआ, तो उसने देखा कि गुफा के भीतर एक दूसरी ही दुनिया छिपी हुई थी। दीवारों पर अजीब-सी चमकदार लिपियाँ थीं, और ठंडी हवा शरीर को सिहरा देने वाली थी। अचानक, उसे उसकी बकरियाँ और गायब हुए गाँववाले दिखे। लेकिन बकरियाँ अधमरी हालत में पड़ी थीं, और गाँववाले बेहोश थे।

तभी वहाँ परियों का झुंड प्रकट हुआ। ये परियाँ साधारण परियाँ नहीं थीं। उनके पंख काले थे, और उनकी आँखों से लाल रोशनी निकल रही थी। उनकी उपस्थिति इतनी भयानक थी कि चरवाहा काँपने लगा।

भय का सामना

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परियों ने चरवाहे को अपनी शक्ति से जकड़ने की कोशिश की। वे अपनी नकारात्मक ऊर्जा से उसे वश में करना चाहती थीं। गुफा की दीवारें गूँजने लगीं, और परियों की आवाजें इतनी डरावनी थीं कि चरवाहा सोचने लगा कि अब उसका अंत निश्चित है।

लेकिन तभी, एक चमत्कार हुआ। गाँव के देवी-देवताओं ने उसे अपनी दिव्य शक्ति से भर दिया। जैसे ही दिव्यता ने उसके भीतर प्रवेश किया, परियों की शक्ति कमजोर पड़ने लगी। वह अब डर से बाहर निकल चुका था और अपने पूरे साहस के साथ खड़ा था।

उस व्यक्ति के भीतर देवी-देवताओं की दिव्य शक्ति आते ही भयानक परियाँ घबरा गईं। उन्होंने अपनी शक्तियों से उसे बाँधने की कोशिश की, लेकिन देवत्व के प्रभाव से उनकी हर कोशिश नाकाम हो गई। उस व्यक्ति ने परियों को आदेश दिया कि वे उसकी खोई हुई बकरियाँ और गाँववालों को तुरंत मुक्त करें।

परियों का समर्पण

परियाँ समझ गईं कि वह अब साधारण इंसान नहीं रहा। वे उसके सामने हाथ जोड़कर माफी माँगने लगीं। उन्होंने कहा कि बकरियों को वापस लाना अब संभव नहीं है क्योंकि वे मर चुकी हैं। लेकिन बदले में वे कुछ विशेष बकरियाँ देने का वादा करती हैं। इन बकरियों की खासियत यह थी कि वे एक बार में चार बच्चों को जन्म देती थीं।

परियाँ उन बकरियों को सौंपने के लिए राजी हो गईं, लेकिन व्यक्ति की दिव्य शक्ति अभी भी असंतुष्ट थी। उसने परियों को गाँव और वहाँ के लोगों से हमेशा के लिए दूर रहने का आदेश दिया। परियाँ डर और दया की भावना में डूबी हुई थीं। उन्होंने वचन दिया कि वे कभी गाँववालों को नुकसान नहीं पहुँचाएँगी और अपनी सीमाओं में रहेंगी।

सुरक्षित वापसी और गुफा का बंद होना

गाँव के लोग उस व्यक्ति और उसकी बकरियों के साथ सुरक्षित लौट आए। जो गाँववाले गुफा में गायब हो गए थे, उन्हें भी सकुशल वापस लाया गया। उस व्यक्ति ने उन गाँववालों को धन्यवाद स्वरूप एक-एक बकरी भेंट की और खुद के लिए भी एक बकरी रखी।

गुफा के भीतर का रास्ता अब हमेशा के लिए बंद हो चुका था। गाँववालों का विश्वास अपने देवी-देवताओं पर और मजबूत हो गया। आज भी लोग उस गुफा को दूर से देखकर डरते हैं और मानते हैं कि वहाँ बुरी शक्तियाँ कैद हैं। लेकिन वे यह भी जानते हैं कि उनके देवी-देवता हर विपत्ति से उनकी रक्षा करने के लिए सदा मौजूद हैं।

यह कहानी गाँव में आज भी सुनाई जाती है और परियों की इस रहस्यमयी दुनिया का जिक्र होते ही हर कोई सिहर उठता है।

Deepak Sundriyal

अपण पहाड़, अपण गाथा